Monday, 4 January 2016

भागवत ज्ञान का मंदिर

नीलेशभाई राज्यगुरु महाराज का कथन 

भगवन को कुछ देना है तो उन्हें सच्चे ह्रदय से भक्तिभाव अर्पित करना चाहिए. ईश्वर सच्चे ह्रदय लोगो से ही प्रसन्न होते है. भगवन यह ज्ञान का मंदिर है. इसकी भी कुछ मर्यादा व नियम होते है. मंदिर में ज्ञान की गंगा व कर्म की सरस्वती बसती है. जिससे सभी श्रोताओं को अपने अंर्तमन से इसे सुनना आवश्यक है. उक्त विचार निलेशभाई राज्यगुरु महाराज ने व्यक्त किये. शहर के सूचक परिवार की ओर से श्री मंगल कार्यालय (गोकुलधाम) में श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञानयज्ञ पारायण की रविवार से शुरुआत की गई. महाराज ने कहा की बड़ी कठिनाइयों से गरजने के बाद मानव को सदैव धर्म के पथ पर चलना चाहिए. भगवन के कार्य, पूजा-अर्चना, माँ-पिता की सेवा यह भी धर्म ही है. धर्म के कार्य से ही संतुष्टि प्राप्त होती है. 

फल बचाएंगे अंतरिक्ष में जान

अब मज़बूरी यह है इनके प्रभावों के विषय में न तो अधिक जानकारी उपलब्ध है, न ही इलाज. इसी के मद्देनजर वैज्ञानिको ने चूहों पर जारी शोध में निष्कर्ष प्राप्त किये की विकिरण युक्त माहौल में रहने वाले जो चूहे स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी, स्पाइनेश आदि की खुराक पर थे, उनमे न्यूरोजिकल हानिया साधारण खुराक पाने वाले चूहों की अपेक्षा बहुत कम पाई गई. वैज्ञानिको के शोध सिद्ध करते है की फल व सब्जिया चूहों में टूयूमर की प्रगति रोक देती है. शायद यह फलों में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट्स के कारण होता है. जो उम्र बढ़ाने की प्रकिया में मस्तिष्क में ऑक्सीडेटिव प्रभावों से लड़ने में मदद करते है. असल में मस्तिष्क की कोशिकाएं समय के साथ उसी तरह ऑक्सीकृत होती रहती है. जिस तरह लोहे का दरवाजा जंग पकड़ता जाता है, लेकिन फल इस जंग को खत्म करके कोशिकाओ को फिर से जवां कर देते है. सो अंतरिक्ष यात्रा के नए नियम लिखे जाने लगे है. सुदूर ग्रहो की यात्रा के आरंभ से कुछ दिन पहले से ही फलों अथवा उनके रस सार की खुराक पर रखा जाने लगेगा. इसके साथ ही अंतरिक्ष यान का एक कोना फलों व उसन के लिए रिजर्व हो जायेगा. यही नहीं,  वैज्ञानिक चाहते है की जल्द पूरा का पूरा बागान ही अंतरिक्ष यान के साथ भेजा जाये जो उनकी ऑक्सीजन की प्राकृतिक रूप से आपूर्ति करने के साथ ही विकिरण से बचने के उपाय तो पेश करे ही, खाने का एक स्वादिष्ट और स्वस्थ पर्याय भी बने.

  • वैसे ताजे फल और सब्जिया अंतरिक्ष में पहली मर्तबा जायेगे. ऐसा नहीं है. सेब केले और गाजर आदि को पहली बार अप्रैल 1983 में अंतरिक्ष में खाने के साथ भेजा गया था. इसके बाद संतरे, नाशपाती, अंगूर, प्याज लहसुन और टमाटर आदि भी भेजे जाने लगे. लेकिन, इसमें केले और संतरे अपनी उत्पादन गंध के कारण कम लोकप्रिय हो गए 
  • ताजे फल और सब्जिया 16 से 24 घंटे पहले अंतरिक्ष यान में लोड किये जाते है. लेकिन इनकी पैकेजिंग खुलते ही गंध अंतरिक्ष यान में व्यात हो जाती है. इसके साथ ही इन्हे अंतरिक्ष में खाने की दिक्क्त तो है ही जिसके कारण इन्हे टुकड़ो में करके पैक किया जाता है.
  • माइक्रो ग्रेविटी में आगमन पर कुछ चालक दल के सदस्यों को मितली की शिकायते भी आम है. इसके बावजूद इनके प्रभावों को देखते हुए इनके उपयोग को प्रतिबंधित नही किया गया. लेकिन अब उन्हें उगाने की तैयारी के साथ ही उनके विकिरण से बचाव का पक्ष भी सामने आ गया है. तो छोटी-मोटी परेशानिया तो झेली ही जा सकती है.

Sunday, 3 January 2016

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विश्वास की थैली
एक डाकू था जो साधू के भेष में रहता था. वह लूट का धन गरीबो में बांटता था. एक दिन कुछ व्यापारियों का जुलुस उस डाकू के ठिकाने से गुजर रहा था. सभी व्यापारियों को डाकू ने घेर लिया. डाकू की नजरों से बचाकर एक व्यापारी रुपयों की थैली लेकर नजदीकी तंबू में घुस गया. वहां उसने एक साधू को संभालने के लिए दे दी. साधू ने कहा की तुम निचिंत हो जाओ. डाकुओं के जाने के बाद व्यापारी अपनी थैली लेने वापस तंबू में आया. उसके आर्चर्य का पार न था. वह साधू तो डाकुओं की टोली का सरदार था. व्यापारी वहां से निराश होकर वापस जाने लगा मगर उस साधू ने व्यापारी को देख लिया. उसने कहा रुको तुमने जो रुपयों की थैली रखी थी वह ज्यों की त्यों ही है. अपने रुपयों को सलामत देखकर व्यापारी खुश हो गया. डाकू का आभार मानकर वह बाहर निकल गया. उसके जाने के बाद वहां बैठे अन्य डाकुओं ने सरदार से पूछा की हाथ में  धन को इस प्रकार क्यों जाने दिया सरदार ने कहा व्यापारी मुझे भगवन का भक्त जानकर भरोसे के साथ थैली दे गया था. उसी कर्तव्यभाव से मैंने उन्हें थैली वापस दे दी. किसी के विश्वास को तोडने से सच्चाई और ईमानदारी हमेशा के लिए शक के घेरे में आ जाती है. 

गुलफ़ाम

सामने मेरे तुम बैठे हो ऐसा लगता है 
तुम मुझसे कुछ खफा हो 
तुम्हे मनाने को जी करता है
तुम्हे दिल में बसाने को जी करता है
सारी दुनिया में तुम्ही तो गुलफ़ाम हो 
जैसे अम्बर का तुम महताब हो 
यह हसरत न थी कभी मेरी रूह को 
हमें भी मुहब्बत होंगी 
दिल ही दिल में आहें भरेंगे कभी
यह ऐतबार  न था किसी को 
सच मोहब्बत तुम ख़ुद भी 
क्या ग़जब एहसास हो 
जैसे चमन में महकता
कोई खिला गुलाब हो.

Saturday, 2 January 2016

हवा में बनाया टैटू

कुछ लोगो को हवा में करतब दिखाते तो आपने खूब देखा होगा, लेकिन क्या किसी को हवा में छलांग लगा कर टैटू बनाते देखा है? कनाडा के एक शख्स ने स्काइडाइविंग के वक़्त अपने दोस्त की हथेली पर टैटू बनाकर सभी को चौका डाला. यह करतब उसने ३० सेकंड से भी कम समय में किया. कनाडा में शेनन क्लेडन और नेडिन एलेन नाम के 2 दोस्त जिस वक़्त स्काइडाइविंग कर रहे थे, उसी वक़्त शैनन ने नैडीन को हथेली पर टैटू बना दिया. १२० मिल प्रति घंटे की रफ़्तार से जमीन पर आने के बावजूद शैनन के अनुसार टैटू बनाने के दौरान हवा सबसे बड़ी मुसीबत बनी रही थी, लेकिन इसमें उन्हें खूब मजा आया. 

मिल गया खाद्य पदार्थो के उत्पादन के द्वार खोलने वाला जादुई पौधा

अंतरिक्ष यात्रियों के लिए यह खबर भी सुखदायी हो सकती है कि ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिक ने एक ऐसे जादुई पौधे को ढूंढ निकला है जो नही के बराबर बारिश में भी फल फूल सकता है. हालांकि पिटजुरी बनाम प्राचीन तम्बाकू  के पौधे निकोटियाना बेथामियाना चूँकि अपना प्रतिरक्षा तंत्र खो चूका है.इसलिए अभी तक वैज्ञानिक उसे शोध में मॉडल जैसे उसी तरह इस्तेमाल करते आ रहे थे, जैसे की विभिन्न परीक्षणों के लिए प्रयोगशाला में चूहे को काम में लिया जाता है.

हाल ही में अन्तर्राष्टीय स्पेस स्टेशन में सलाद उगाकर उसके ताजा-ताजा सेवन के साथ ही एक नई क्रांति की शुरुआत भी हो चुकी है. लेकिन, अब बेहद कम पानी में भी फायदों की सौगात के साथ-साथ ऑक्सीजन की आपूर्ति करने की इसकी खासियत को अंतरिक्ष में भरपूर तरीके से भुनाने की तैयारी जारी है. जिसे कह सकते है- हींग लगे ना फिटकरी, रंग चोखा ही चोखा...

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स्वर्ग और नरक
एक युवक था. वह बंदूक और तलवार चलाना सिख रहा था. इसलिए वह यदा-कदा जंगल जाकर खरगोश लोमड़ी और पक्षियों आदि का शिकार करता शिकार करते-करते उसे यह घमंड हो गया की उसके जैसा निशाने बाज कोई नहीं है और न उसके जैसा कोई तलवार चलाने वाला. आगे चलकर वह इतना घमंडी हो गया की किसी बड़े के प्रति शिष्टाचार भी भूल गया. उसके गांव के बाहर कुटिया में एक संत रहते थे. वह एक दिन उनके पास पंहुचा. न उन्हें प्रणाम किया और न ही अपना परिचय दिया. सीधे उनके सामने पड़े आसन पर बैठ गया और कहने लगा, लोग बेकार में स्वर्ग-नरक में विश्वास करते है.? संत ने उससे पूछा तुम तलवार साथ में क्यों रखते हो? उसने कहा मुझे सेना में भर्ती होना है कर्नल बनना है. इस पर संत ने कहा तुम्हारे मैं भर्ती किये जाते है? पहले अपनी शक्ल शीशे में जाकर देख लो, यह सुनते ही युवक गुस्से में आ गया और उसने म्यान से तलवार निकाल ली. तब संत ने फिर कहा, वाह तुम्हारी तलवार भी कैसी है? इससे तुम किसी भी बहादुर आदमी का सामना नही कर सकते,क्योकि वीरो की तलवार की चमक कुछ और ही होती है फिर तो युवक गुस्से से आग-बबूला हो गया और संत को मारने के लिए झपटा. तब संत ने शांत स्वर से कहा अब तुम्हारे लिए नरक का दरवाजा खुल गया, यह सुनते ही युवक की अक्ल खुल गई और उसने तलवार म्यान में रख ली अब वह सर झुकाकर संत के सामने खड़ा था और अपराधी जैसा भाव दिख रहा था. इस पर संत ने कहा अब तुम्हारे लिए स्वर्ग का दरवाजा खुल गया.